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सीएमडी प्रोफाइल

श्री प्रभात कुमार सिन्हा ने दिसम्बर 2017 से एनसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक का पदभार ग्रहण किया है और चरम जिम्मेवारी के साथ कंपनी के प्रदर्शन, लोग और उपक्रम के लिए कार्य कर रहे है जिसमे कंपनी के व्यावसायिक योजना का विकास और कार्यान्वित करना शामिल है। जनवरी 1962 में पैदा हुए श्री सिन्हा ने स्नातक की उपाधि रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज रायपुर से खनन अभियांत्रिकी(इंजीनियरिंग) में वर्ष 1982 में प्राप्त की। उन्होने अपना स्नात्कोतर वर्ष 1988 में आईएसएम –धनबाद से ‘माइन प्लानिंग और डिज़ाइन’ में पूरा किया। श्री सिन्हा खुली खदान और भूमिगत खदान कार्यो में 36 सालों के पेशेवर अनुभव से युक्त है। उन्हे कोल इंडिया लिमिटेड के वयक्ति,वस्तु और परियोजना प्रबंधन एवं परिचालन का व्यापक अनुभव है।

एसईसीएल, डबल्यूसीएल और एनसीएल के खुली खदान और भूमिगत खदानों में श्री सिन्हा ने उत्पादन इकाई के प्रमुख के रूप में लगातार वर्षो में 100% से अधिक लक्ष्य प्राप्ति की उपलब्धि के साथ कार्य किया है। उन्होने सीएमपीडीआईएल मुख्यालय के विज्ञान एवं प्रोध्योगिकी विभाग में भी कार्य किया है। वर्ष 2007 से 2016 तक एनसीएल में प्रोजेक्ट मैनेजर (योजना प्रबन्धक) और प्रोजेक्ट हैड के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होने अपने करियर (पेशेवर जीवन) में कई रंग जोड़े है। उन्होने अपनी टीम को एक दिन में 2.05 लाख टन के सर्वाधिक उत्पादन, जो की जयंत क्षेत्र के इतिहास में रिकॉर्ड है के लिए प्रेरित किया। उन्होने एनसीएल के जयंत और अमलोहरी ओसीपी में एक आक्रामक प्रक्रिया पुनर्रचना कार्यक्रम का नेतृत्व किया जिसमे कम लागत पर अपनी उतपादकता में सुधार किया।

श्री सिन्हा को एसईसीएल में 03 अगस्त 2016 को निदेशक (पी एंड पी) के पद पर नियुक्त किया गया और अपने एक वर्ष चार माह के कार्यकाल के दौरान इन्होने 752.459 हैकटेयर भूमि का भौतिक अधिग्रहण किया, एमओईएफ़(MOEF) और सीसी से 8 खदानों के लिए टीओआर और एक के लिए ईसी(EC) प्राप्त किया, 383 हेक्टेयर वैन भूमि के लिए चरण II की अनुमति पाई और एसईसीएल डम्प ढलानों की निगरानी हेतु स्लोपे स्तबिलिटी रडारो(ढलान स्थिरता रडारो) को प्रचलित किया।

श्री सिन्हा ने वर्ष 2008 में पोलैंड में तथा 2011 में इस्तांबुल, तुर्की में विश्व खनन काँग्रेस में भारतीय कोयला उद्योग का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होने वर्ष 2014 के दौरान उन्नत प्रबंधन विकास कार्यक्रम में प्रशिक्षण के लिए स्वीडन स्विट्जरलैंड, और जर्मनी का भी दौरा किया। वह सितंबर 2016 के दौरान लास वेगास, यूएसए अंतर्राष्ट्रीय मिनएक्स्पो 2016 का भी हिस्सा थे। 16-25 जून 2017 की अवधि के दौरान सीआईएल/सीएमपीडीआई और सीआईएसआरओ ऑस्ट्रेलिया के बीच एमओयू के तहत प्रोध्योगिकी मिशन का प्रतिनिधित्व करने का सम्मान भी इन्हे प्राप्त है।

उनकी योग्यता, उनके तकनीकी पेपर जिसका शीर्षक ‘डम्प स्लोपे मोनिट्रिंग एट जयंत- द न्यू परसपेक्टिव’ है और जिसे चौथे एशियन माइनिंग काँग्रेस जो वर्ष 2012 में कोलकाता में आयोजित हुआ था में प्रस्तुत किया गया था, में अभिवक्त होती है। इसके अतिरिक्त तकनीकी पेपर जिसका शीर्षक’ इफैक्ट ऑफ प्रॉडक्शन ब्लास्ट ऑन डम्प स्तबिलिटी इन ओपेन पीट माइंस’ है और जिसे एफ़आरएजीबीएलएएसटी-10 जिसका आयोजन नवम्बर 2012 को नई दिल्ली मे हुआ था, तथा तकनीकी पेपर जिसका शीर्षक ‘ इनवायरनमेंट सस्टेनिबिलिटी एनालिसिस इन एसईसीएल’ है और जिसे एनएक्सजीएनएमआईएफ़यू(NxGnMiFu)- 2017 सम्मेलन नई दिल्ली में (15-17 फ़रवरी 2017) प्रस्तुत किया गया था में अभिवयक्त होती है।

उन्हे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है जैसे की वर्ष 2010-11 के लिए एमपीसीसीबी- भोपाल द्वारा परियोजना प्रमुख के रूप में पर्यावरण-प्रबंधन में उक्तृस्टाता सम्मान, लगातार दो वर्षो (2012,2013) के लिए सर्वश्रेष्ठ खानप्रबंधक का एच बी घोष मेमोरियल पुरस्कार, जिसकी मेजबानी एमजीएमआई द्वारा कोलकाता में की गयी थी। वर्तमान में वे माइनिंग, जिओलोजिकल एंड मेटालर्जिकल इंस्टीट्यूट और इंडियन माइन मैंनेजर्स एसोशिएसन के साथ संबंध है।

श्री सिन्हा कार्य में अपने बहू-आयामी अनुभव का उपयोग करते है जिससे की वे सक्षम रणनीतिकार बन सके और संस्थान को सर्वाधिक लाभकारी दिशा में ले जा सके तथा संकट-प्रबंधन में सफलता प्राप्त कर सके। वह संस्थान में अपने नेतृत्व क्षमता को स्वतंत्र विचार- विनियम, टीम-वर्क और एक सकारात्मक मोनोबल के साथ निष्पादित करते है।